Wednesday, 30 October 2013

"एक कदम पीछे"

कभी-कभी जब पार करनी हो कोई गहरी खाई,
तो दूर से दौड़ कर आने के लिए,
एक ऊंची छलांग लगाने के लिए,
लेना पड़ता है एक कदम पीछे,
समेटने को अपनी ऊर्जा और देने को अपनी छलांग को ऊँचाई,
तभी पार हो पाती है कोई खाई,
वो एक कदम पीछे लेने को तैयार हूं मैं,
ऐ खाई तू ना डरा मुझे,
ऐ किस्मत तू ना रूला मुझे..
देख लूँगी तुझे भी अच्छी तरह,
उस पार ज़रा आने दे मुझे,
एक कदम पीछे बढ़ाने दे मुझे,
खाई के उस पार आने दे मुझे,
क्यूंकि मैं एक पल को झुक सकती हूँ,
एक बूढ़े पेड़ के नीचे,
पर मैंने रूकना नहीं सीखा,
चलते -चलते गर सांस भी थम जाये,
तो गम नहीं, ग़म तो यूँ भी जमाने में कम नहीं,
पर मुझे पता है कि मुझमें है अक्षय ऊर्जा का भंडार,
जो रौशन कर सकता है चंद लोगों का संसार,
मुझे उन चंद लोगों की तलाश है,..
मुझे कर्म की बस प्यास है,
ऐ खाई तू ना डरा मुझे...अब भी बाकी आस है,
एक कदम पीछे बढ़ाने दे मुझे... जब तक मुझमें सांस है।।




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