Sunday, 20 July 2014

हमारा नेता कैसा हो .. .(भाग-2)


हमारी फौजों में नेता के लिए एक शब्द प्रयुक्त होता है – ऑफिसर लाइक क्वालिटीज़” (OLQ) यानि इन गुणों का एक खांचा तैयार किया गया है और जिसके तहत ऐसा माना जाता है कि ऑफिसर अपने आदेशों के ज़रिए काम कराए और अपने आदेशों को विभाजित करे और सिपाहियों के पास यस सर कह कर उन आदेशों का पालन करने के सिवाय और कोई चारा नहीं होता किन्तु ये पूरा का पूरा खांचा तब से अपनाया और पालित किया जा रहा है जब ब्रिटिश आर्मी हमारे देश में हुआ करती थी । फौज़ के मामलों में ये सही भी है क्योंकि सीमा पर युद्ध के समय ये आवश्यक हो जाता है कि सभी सिपाही और पूरा दल सिर्फ़ अपने अगुआ के आदेश का पालन करें क्योंकि उनका नेता उसी कठिन परीक्षा और ट्रेनिंग से गुज़र कर वहाँ तक पहुँचता है जिससे उसके दल के सिपाही गुज़रे होते हैं । सभी ने शारीरिक रूप से उतनी ही मेहनत की होती है बस फ़र्क उनके मानसिक स्तर में होता है जो उनकी शिक्षा के स्तर के कारण होता है किन्तु समय पड़ने पर ये नेता अपनी जान की बाज़ी लगाने से भी नहीं चूकते ।

 कहने का आशय ये है कि फ़ौजी दुनिया में तो आदेश देने की बात समझ आती है क्योंकि वहां कोई आलसी व्यक्ति शायद ही पहुँच पाये किन्तु बात अगर आम नागरिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों की हो तो नेता को अपने दल से मिलने वाली विभिन्न सलाहों के लिये खुला होना भी आवश्यक है, साथ ही उसका स्वयं मेहनती होना भी आवश्यक है । यदि कोई नेता अपने दल के उन्हीं दो- चार सदस्यों से काम कराता रहे जो बिना उसके कहे भी अपना काम ख़ुशी से कर देते हैं तो ये कोई नेतृत्व क्षमता का परिचय नहीं है । यदि ऐसा नेता अपने इन सदस्यों के मुँह पर इनकी तारीफ़ करे और पीठ पीछे इन्हें गधा समझे तो ये उसकी मूर्खता होगी क्योंकि उस नेता को ये भान नहीं होता कि ये उसके दल के वो सच्चे लोग हैं जिन्हें वास्तव में अपनी ज़िम्मेदारियों का एहसास है । नेताओं को चाहिए कि वो अपनी टीम के आलसी से आलसी व्यक्ति से भी प्यार से काम करवा सके लेकिन ऐसा तभी होगा जब वो स्वयं मेहनती और उत्तरदायी होगा । एक ऊर्जावान और मेहनती नेता की लोग इज़्जत भी करते हैं और उसका अनुसरण भी करते हैं ।
 
मशहूर शायर और लेखक शहऱयार जी कहते थे- किसी बेतरतीब चीज़ को देखकर अग़र आपके दिल में ख़लल पैदा न हो, उसे ठीक करने की बेचैनी ना हो, तो आप कलाकार नहीं हो सकते

और मैं नेता के लिए भी यही बात कहूंगी कि उसे दिल और आत्मा से कलाकार होने की ज़रूरत है, रचनात्मक होने की ज़रूरत है क्योंकि उस पर एक कलाकार से भी बड़ी ज़िम्मेदारी होती है । विभिन्न कलाओं को समेट कर चलने की,सबका सम्मान करने की,सबको ऊर्जा देने की, सही और ग़लत की पहचान करने की । इसलिए एक नेता में विश्नास का होना बेहद आवश्यक है ।   


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