अजीब सवाल है....हमारा नेता कैसा हो ? सबसे पहली बात ये
कि आख़िर नेता होता कौन है ? मुझे तो इस शब्द का यही अर्थ पता है कि “नेता” वो होता है जो नीति
का पालन करे, जो नीति से चले वही नेता है । पर क्या हमारे नेता इस शब्द के अर्थ
में स्वयं को समाहित कर रहे हैं ? मैं राजनैतिक नेताओं की नहीं वरन् जीवन के हर एक
क्षेत्र में नेतृत्व करने वाले व्यक्तियों की बात कर रही हूँ , फिर चाहे वो किसी
स्कूल के प्रधानाध्यापक हों , किसी विश्वविद्यालय के कुलपति हों, किसी छात्र संगठन
का प्रणेता हो ,किसी सरकारी अथवा ग़ैर-सरकारी महक़मे के अध्यक्ष हों या फिर किसी
निजी संस्थान के किसी भी विभाग के उच्च पद पर आसीन लोग.....ये सभी इस नेता शब्द
में समाहित होते हैं । जीवन के कुछ क्षेत्रों में तो सर्वसम्मति और लोगों का प्रेम
ऐसे लोगों को निर्विरोध अपना अगुआ चुन लेता है जो इस पद के वास्तव में लायक होते हैं
किन्तु आज के समय में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो या तो जुगाड़ से या “सो कॉल्ड सेटिंग” से इस पद को पा
लेते हैं और नतीजा ये होता है कि ऐसे नेता किसी भी बात की ज़िम्मेदारी स्वयं नहीं
लेते, दूसरों के कंधे पर बंदूक रख कर निशाना साधते हैं । उनके पद और रूतबे के कारण
लोग उनका विरोध नहीं कर पाते और अपना गुस्सा अपने सहकर्मियों पर निकाल देते हैं ।
नेता वो नहीं होता जो अपनी
टीम के सदस्यों से ये अपेक्षा करता रहे कि वो उनके समक्ष कोई सुझाव या प्रस्ताव
रखें और नेता उन्हें स्वीकार अथवा अस्वीकार करने मात्र के लिए बैठा रहे । एक सही
और अच्छा नेता वो है जो ख़ुद “इनिशियेटिव” ले और अपनी टीम से
एक क़दम आगे बढ़कर नये विचारों को साझा करे, यदि वो आगे बढ़ कर सामने नहीं आ सकता
और पीछे बैठ कर खेल का मज़ा लेना चाहता है तो वो इस पद के बिल्कुल भी लायक नहीं है
। नेता वो होता है जो “पड़ी लकड़ी उठाता है” , नेता वो होता है
जिसे अपनी टीम के किसी भी सदस्य के दुख पर दुख होता है, नेता वो होता है जो
संज्ञान लेकर क़दम उठाता है और बात को आगे पहुँचाता है, नेता वो होता है जो
दूरदर्शी होता है । नेता वो नहीं होता जो ये सोचता हो कि कैसे भी कर के काम होने
से मतलब है बल्कि सही नेता ये सोचता है कि काम सही तरीके से, नीति से , नियमों से
और स्वच्छ वातावरण में हो जहाँ कोई किसी के लिए द्वेष ना रखे । नेता वो होता है जो
अपनी संस्था के कामों में उतनी ही रूचि दिखाये जितनी कि उसके दल में काम करने वाले
लोग दिखाते हैं ताकि उसके दल को ये महसूस हो कि उनका नेता काम को लेकर कितना गंभीर
है अन्यथा उसका आलसी रवैया पूरे दल को हतोत्साहित और निरूत्साहित कर सकता है । एक
अच्छा नेता ख़राब से ख़राब टीम के साथ भी जुझारू प्रदर्शन करने की क़ाबिलियत रखता
है और एक आलसी और ग़ैर-ज़िम्मेदार नेता अच्छी से अच्छी टीम को ले डूबता है ।
नेता
भी अपनी टीम के सामने आंसू बहा सकता है क्योंकि यदि वो अपने दल के किसी भी सदस्य
की किसी परेशानी के लिए ख़ुद को दोषी पाता है तो इसका तात्पर्य यही है कि उसे
दूसरों की ख़ुशियों का भी ख़्याल है और वो दिल से दुखी होता है । ऐसा बिल्कुल भी
नहीं है कि एक भावनात्मक व्यक्ति में नेतृत्व क्षमता नहीं हो सकती । यदि वो नीयत
से नेक है तो हाथ में शक्ति होने पर भी अपने दल की प्रगति के विषय में ही सोचता है
।
जारी है...........(भाग-2)....
No comments:
Post a Comment