Saturday, 24 August 2013

ख़ुदी में ख़ुदा

ख़ुद ही ख़ुद को तू ख़ोदेगा तो खोदे कम नहीं होगा,
तू जितना खोदेगा ख़ुद को कभी बंजर नहीं होगा,
ख़ुदी से कर ले ये वादा ,कभी गुमसुम नहीं होगा,
अगर जो तुझमें हिम्मत है , ख़ुदा फिर तेरे संग होगा।।

तुझे क्या सीख कोई दे, किसी की नकल क्या करना,
तुझे दिन-रात है, ख़ुद की बनाई राह पर चलना,
कोई तुझसे ग़र ये कह दे कि तूने उससे सीखा है,
उसे ख़ुद ही पता होगा कि तूने किससे सीखा है।।

किसी की क़ामयाबी पर तू न जलना, न ही बुझना,
ख़ुद ही ख़ुद को जला इतना, तपा इतना,
कि सौ फ़ीसद ख़रा सोना, तुझे ख़ुद ही से है बनना,
समझ ले ख़ुद की ताकत को, ज़माने से है क्या डरना।।

ख़ुद ही से तेरी हस्ती है, ख़ुद ही से है तेरा नग़मा,
तू सुनना ख़ुद के दिल की ही, वही करना जो ख़ुद कहना,
ख़ुदी को कर बुलन्द इतना, किया न हो ख़ुदा ने भी जितना,
तभी पूछेगा ख़ुदाया भी, बता क्या है तेरी तक़दीर में लिखना,
ख़ुदी को कर बुलन्द इतना, ख़ुदी को कर बुलन्द इतना।।  




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