चल पड़ा है ज़माना
इतनी रफ्तार से..
कि रूकेगा कहाँ ना
इसे है ख़बर...
ऐसा टूटा है लोगों
का अब तो सबर..
कूदे-फांदे चले हैं
वो हर राह पर....
पूछते अब नहीं लड़के
– “बॉयफ्रेण्ड है या नहीं”
उठाते हैं प्रश्न
सीधे अब “वर्जिनिटी” पर…..
लड़कियाँ भी रही कम
ना होंगी तभी तो..
हैं लड़के पहुँचे आज
इस मोड़ पर....
कोई कैसे रखे अब
विवाह-प्रस्ताव..
जवाब आता है- “लिव-इन” में रह
जाओ...
हम कहते हैं , ये
क्यूँ भला....
जब “लिव-विथ” का
ऑप्शन है खुला हुआ...
सरकार भी अपनी लिव-इन के मज़े उठा रही है..
गिरती अर्थव्यव्स्था
का आरोप एक-दूजे पर लगा रही है...
कल को स्कूलों में
जन्म प्रमाण-पत्र नहीं,
डी.एन.ए. रिपोर्ट
मांगी जायेगी...
आने वाली पीढ़ी
ग़ैर-ज़िम्मेदार कहायेगी...
सवाल ये है कि ऊर्जा
से भरपूर और कर्म को समर्पित ये युवा
शादी से क्यूँ घबरा
रहे हैं.....
बेरोज़गारी का तमगा
डरा रहा है उन्हें ..
या कि बेवजह अल्डड़
और मस्त हुए जा रहे हैं...
सालों साल चलाते हैं
प्रेम-सम्बन्ध...
पर विवाह से पहले ही
विच्छेद तक पहुँच जाते हैं...
ये तो बड़ी आम बात
है, ख़ास ये है कि...
यदि कोई एक तरफा
प्रेम में है तब भी उसे ना नहीं मिलती...
मिल जाता है एक
जवाब- “देखिए,हम विवाह नहीं कर सकते,एक काम कीजिए,
“लिव-इन में रह लीजिए”।

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